बुधवार, 10 अगस्त 2022

अनाथो की माँ सिन्धुताई सपकाल की जीवनी और अनमोल विचार


       आज हम उस बच्ची की कहानी पेश कर रहा हु ओ कहानी अच्छी भी है और सच्ची भी है जिसका जन्म हुआ १४ नोहंबर १९४८ को महाराष्ट में वर्धा जिले के 'पिंपरी मेघे' गाँव  में बच्ची जब पैदा होई तो घर वाले दुख में डूब गए कहते है हमारे घर में बच्ची कैसे हो सकती है बच्ची को पड़ने लिखने से दूर रखा १० साल के उम्र में उसकी शादी करा दी शादी के बाद ही ससुरवालोने उसको घर से बहार कर दिया जिस दिन घर से बहार निकला उसकी गोदमे १० दिन की बच्ची थी मई उस बच्ची की कहानी सुना रहा हु जिसके जीवन में सुरुवाती में बहुत सारा दुख है लेखिन आखरी में सारा सुख ही सुख है बाद में ओ हजारो बच्चो की माँ बन गई आज हम बात कर रहे है सिंधु ताई सपकाल की तो आइये जानते है उनकी पूरी कहानी 

     सिन्धुताई का जन्म १४ नवम्बर १९४८ को महाराष्ट्र के वर्धा जिले के 'पिंपरी मेघे' गाँव मे हुआ। उनके पिताजी का नाम 'अभिमान साठे' है, जो कि एक चरवाह (जानवर चरानेवाले) थे। लैंगिक भेदभाव के चलते उन्हें घर में 'चिंधी' (कपड़े का फटा टुकड़ माँ के विरोध और आर्थिक सीमाओं के रहते इनकी शिक्षा मे बाधाएँ आती रही और इनकी शिक्षा चौथी कक्षा तक ही हो पाई।

    जब सिंधुताई सिर्फ दस साल की थीं, जब उनकी शादी उनसे 10 साल बड़े व्यक्ति श्रीहरी सपकाल से कर दी गई थी. उनका जीवन चुनौतियों से भरा था. बाल विवाह के चंगुल का शिकार होने के बाद भी युवा सिंधुताई जीवन के प्रति आशावादी थी. बल्कि, संवेदनशील और दुर्व्यवहार के प्रतिकार में मदद करने के लिए उसका उत्साह बढ़ गया. अपने पति के घर में बसने के बाद, वह जमींदारों और वन अधिकारियों द्वारा महिलाओं के शोषण के खिलाफ खड़ी हुई.

                                 अनाथो की माँ  सिन्धुताई सपकाल की जीवनी और अनमोल विचार

    वह नहीं जानती थी कि इस लड़ाई के बाद उसका जीवन और मुश्किल हो जायेगा. जब वह बीस वर्ष की उम्र में गर्भवती हुई, तो एक क्रोधित जमींदार ने बेवफाई (यह बच्चा किसी और का हैं) की घृणित अफवाह फैला दी, जिसके कारण अंततः सिंधुताई की उसके समुदाय से बाहर निकाल दिया गया.

    उसके पति ने उसे ऐसी गंभीर हालत में बुरी तरह से डांटा और घर से निकाल दिया. उसी रात सिंधुताई बेहद निराश और हतप्रभ महसूस कर रही थी, उसने अपनी बेटी को गौशाला में जन्म दिया. वह किसी तरह अपने पैतृक घर तक पहुँचने के लिए संघर्ष करती रही, लेकिन उसे अपनी माँ से भी ऐसी ही अस्वीकृति का सामना करना पड़ा. सिंधुताई ने अपने जरूरतों को पूरा करने के लिए सड़कों और रेलवे स्टेशनों पर भीख मांगने का सहारा लिया. उसका जीवन अपने और अपनी बेटी के अस्तित्व के लिए किसी संघर्ष से कम नहीं था. 

आंतरराष्ट्रीय स्तर पर

सिंधुताई ने अपनी संस्था के प्रचार के लिए और कार्य के लिए निधी संकलन करने के हेतू से प्रदेश दौरे किए आंतरराष्ट्रीय मंचपर उन्होंने अपनी वाणी और काव्य से समाज को प्रभावित किया है। विदेशी अनुदान आसानी पूर्वक मिले इस उद्देश से उन्होंने मदर ग्लोबल फाउंडेशन संस्था की स्थापना की।

सिन्धुताई सपकाल को मिले हुए अवार्ड्स – 

2015 – अह्मदिय्य मुस्लिम पीस प्राइज फॉर दी इयर 2014

2014 – बसवा भूषण पुरस्कार 2014 अवार्ड, बसवा सेवा संग पुणे की और से।

2013 – मदर टेरेसा अवार्ड फॉर सोशल जस्टिस।

2013 – दी नेशनल अवार्ड फॉर आयनिक मदर।

2012 – रियल हेरासेस अवार्ड, CNN – IBN एंड रिलायंस फाउंडेशन की और से।

2010 – अहिल्याबाई होलकर, अवार्ड, महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिया जाता है।

2008 – वुमन ऑफ़ दी इयर अवार्ड, लोकसत्ता द्वारा दिया जाता है।

1996 – दत्तक माता पुरस्कार।

1992 – लीडिंग सोशल कंट्रीब्यूटर अवार्ड।

सह्याद्री हिर्कानी अवार्ड

शिवलीला महिला गौरव अवार्ड।

सिन्धुताई सपकाल की संस्था

सन्मति बाल निकेतन, भेल्हेकर वस्ति, हडपसर पुणे

ममता बाल सादन, कुम्भरवालन, सस्वाद

माई आश्रम चिखलदरा, अमरावती

अभीमान बाल भवन, वर्धा

गंगाधरबाबा छात्रालय गुहा

सप्तसिंधु महिला अधर बालसंगोपन आणि शिक्षण संस्था पुणे

अनमोल विचार

1.अगर आपके जिंदगी में परेशानी दिक्कतें आती है तो ऊपर वाले का शुक्रिया करो और संकट को सलाम करो क्योंकि यही ऐसी परिस्तिथि है जो आपको आगे का सफल होने का रास्ता दिखाएगी.

2.दुनिया खुद के लिए मरती है कभी दूसरों के लिए जी कर देखो जिंदगी सफ़ल हो जाएगी।

3.बहुत ऐसे लोग है जिन्हे आपकी जरुरत हो सकती है . आपके माता पिता बहन भाई, आस पड़ोस उनके लिए कभी जी कर देखो जिंदगी सफल हो जाएगी।

4.छत्रपति के मावले, आपकी छोटी सी मदद कई बच्चों की जान बचेगी

5.भगवान हमें हंसना सिखाएं लेकिन हम कब रोए? इसे भूलने न दें

6.संकट हमें ऊर्जा देता है संकट हमें नए रास्ते दिखाता है संकट हमें नया नजरिया देता है विपरीत परिस्थितियों से न डरें, संघर्ष करते रहें

7.आने वाला दिन वही नहीं है तो हार मत मानो


कृपया इन Motivational Quotes in Hindi को आप बहुत ध्यान से पढ़िए और सफलता की ओर एक और कदम बढ़ा दीजिये - हमें आशा है कि आपको यह article बहुत  पसंद आया होगासिन्धुताई सपकाल की जीवनी और अनमोल विचार कैसा लगा कमेंट में जरुर बताये और इस शेयर भी जरुर करे.

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