बुधवार, 27 जुलाई 2022

यदि आप एकाग्रता बढ़ाने चाहते हो तो ये आसन नियमित रूप से करना चाहिए

        आज हम एक योगासन के बारे  में  जानेंगे उस आसन का नाम है वृक्षासन ये आसान से आपको बहुत फायदा होने वाला है आप इसे हर रोज करे आपके जीवन में बहुत बदलाव और शांति आएँगी तो चलो देखते है वृक्षासन कैसे करते है और  उसके क्या क्या फायदे है 
     यह नाम संस्कृत के शब्द वृक्षा से लिया गया है जिसका अर्थ है "वृक्ष", "पेड़" और आसन जिसका अर्थ है "मुद्रा"। वृक्षासन मध्यवर्ती स्तर योग मुद्रा है। यह पैरों, हाथों, रीढ़ और कंधों को मजबूत करने में मदद करता है। अधिकांश अन्य योगों के विपरीत, इस मुद्रा के लिए आपको अपनी आँखें खुली रखने की आवश्यकता होती है ताकि आपने शरीर को संतुलित कर सके।

 Vrikshasana  करने का तरीका :- 

  • हाथों को बगल में रखते हुए सीधे खड़े हो जाएँ।
  • दाहिने घुटनें को मोड़ते हुए अपने दाहिने पंजे को बाएँ जंघा पर रखेंI आपके पैर का तलवा जंघा के ऊपर सीधा एवं ऊपरी हिस्से से सटा हुआ हो।
  • बाएँ पैर को सीधा रखते हुए संतुलन बनाये रखें।
  • अच्छा संतुलन बनाने के बाद गहरी साँस अंदर लें, कृतज्ञता पूर्वक हाथों को सर के ऊपर ले जाएँ और नमस्कार की मुद्रा बनाएंI
  • बिल्कुल सामने की तरफ देखें, सीधी नज़र सही संतुलन बनाने में अत्यंत सहायक हैI
  • रीढ की हड्डी सीधी रहे I आपका पूरा शरीर रबर बैंड की तरह तना हुआ होI हर बार साँस छोड़ते हुए शरीर को ढीला छोडते जाएँ और विश्राम करें, मुस्कुराते हुए शरीर और साँस के साथ रहेंI
  • धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए हाथों को नीचे ले आयेंI धीरे से दाहिने पैर को सीधा करेंI
  • सीधे लम्बे खड़े हो जाए बिल्कुल पहले की तरहI अब बाएँ तलवे को दाहिने जांघ पर रख कर आसन को दोहराएं


 Vrikshasana (वृक्षासन) Ke फायदे :-

            योगा विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य आसन की तरह वृक्षासन के भी बहुत फायदे होते हैं। यह आसन शरीर को सही आकार प्रदान करने में मदद करता है और पैरों एवं नितंबों को भी मजबूत बनाता है। मांसपेशियों को टोन करता है और भुजाओं (arms) को शक्ति प्रदान करता है। इसके अलावा कई तरह की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह एक दवा का कार्य करता है। आइये जानते हैं कि वृक्षासन का अभ्यास करने से शरीर को क्या-क्या फायदे होते हैं। 
1. वृक्षासन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और इससे हड्डियों में दर्द की समस्या नहीं होती है। यह आसन शरीर के संतुलन को भी बनाने में मदद करता है। इसके अलावा यह न्यूरो पेशी को भी बेहतर बनाने में सहायक होता है।
2.यह आसन पैरों के अस्थिबंधन और मांसपेशियों को मजबूत करने में बहुत मदद करता है। वृक्षासन करने से पैरों के घुटने मजबूत होते हैं और कूल्हों के जोड़ लचीले बनते हैं।
3.वृक्षासन करने से आंख, कान का अंदरूनी हिस्सा और कंधे (shoulder) मजबूत होते हैं। यह आसन कान के लिए फायदेमंद तो होता ही है साथ में साइटिका (sciatica) की बीमारी को भी दूर करने में मदद करता है।
4.मानसिक शांति मिलती है और काम में ध्यान केंद्रित  होता है। यह आसन शरीर को अधिक सक्रिय रखता है और दिमाग को शांत रखता है।
 
Vrikshasana Me कुछ सावधानियां :- 

किसी भी प्रकार का योग किसी अच्छे ट्रेनर या फिर योग गुरु की देखरेख में ही करना चाहिए।
अगर किसी को मोटापे की समस्या है, तो उसे इस आसन को करने से परहेज करना चाहिए 
गठिया की समस्या होने पर भी इस आसन को नहीं करना चाहिए 
जिन्हें वर्टीगो यानी सिर का चक्कर आता हो, तो भी इस योग को करने से बचना चाहिए 
गर्भावस्था में योग को अकेले नहीं करना चाहिए।
किसी भी प्रकार के योग को जबरन नहीं करना चाहिए, जितनी क्षमता हो उतनी देर ही योग करें तो बेहतर होगा।
योग को सही मुद्रा में और सही जानकारी के साथ ही करना चाहिए।
माइग्रेन, निम्न या उच्च रक्तचाप की समस्या होने पर भी इस आसन को न करें 
सही प्रकार से किया गया योग सेहत और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है। यहां आपने वृक्षासन योग के बारे में विस्तार से जाना। साथ ही आपको इससे होने वाले फायदे और इसे करने के तरीके के बारे में भी यहां जानकारी प्राप्त हुई। साथ ही आपने यह भी समझा कि सुरक्षित तन और तेज दिमाग के लिए यह याेगासन किस प्रकार फायदेमंद हो सकता है। इसके बावजूद यह समझना जरूरी है कि किसी भी योगासन की शुरुआत योग गुरु या फिर स्पेशलिस्ट की मौजूदगी में ही करनी चाहिए। योगासन से जुड़ी ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए पढ़ते रहें स्टाइलक्रेज।

कृपया इस आसन को  को आप बहुत ध्यान से करिये  और एक अच्छी सेहत बनाये  - हमें आशा है कि आपको यह article बहुत  पसंद आया होगा कैसा लगा कमेंट में जरुर बताये और इस शेयर भी जरुर करे
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